
अद्रेश्य होने के बाद भी प्रेम
वायु जल आकाश की तरह वास्तविक है
यह एक सकारात्मक , जीवंत, प्रगतिशील और गतिशील शक्ति है
समुद्र की लहरों की तरह प्रेम भी धाराप्रवाह सा चलता है
मै नहीं जानती वो कौन सी प्रेम की शक्ति है
पर ये जानती हूँ ये है
कही जरुर है
यदि परम ना होता तो प्रथ्वी कब्रिस्तान
सी बन जायेगी
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